बीते कुछ सालों में स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी में तेजी से बदलाव देखने को मिला है. बोले तो सच में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं. हर तिमाही में सब कुछ इतना बदल रहा है कि याद रखने के लिए एक अलग से स्मार्टफोन खरीदना पड़ जाए. तकनीक तो बदली और उन्नत भी हुई लेकिन एक चीज है जो बेहतर तो हुई है लेकिन उससे उम्मीदें कहीं ज़्यादा हैं. हम बात कर रहे हैं स्मार्टफोन की बैटरी की. स्मार्टफोन कंपनी कितने ही दावे कर ले कि इस फोन की बैटरी इतनी चलेगी, लेकिन हकीकत हमको पता है, तो आई आज हम आपको बताते हैं.हम ऐसे में क्या कर सकते हैं कि स्मार्टफोन की बैटरी ज्यादा चले और लंबी भी. बहुत सारे तरीके जैसे कि बैकग्राउंड रिफ्रेश बंद करने से भी इतर कई तरीके हैं जो इसमें आपकी मदद कर सकते हैं. इन सबके बारे में आपको ये भी जान लेना चाहिए कि –

बैटरी क्या होती है?

हमारे स्मार्टफोन में आमतौर पर लीथियम इयॉन (Li-ion) बैटरी यूज होती है. नेवार्क डॉट कॉम के मुताबिक, एक लीथियम इयॉन बैटरी की उम्र तकरीबन 300-500 सायकल या फिर दो से तीन साल होती है फुल चार्ज सायकल पर. चार्ज सायकल से मतलब जीरो से 100 प्रतिशत और फिर जीरो तक आने से होता है. ये तो हुई बैटरी के बारे में बेसिक जानकारी. अब बात आपकी बैटरी की सेहत बेहतर करने की.

चार्जिंग की आदतें

चार्जिंग की आदतें अपने अंदर बहुत कुछ समेटे हुए है और बैटरी की ओवरऑल उम्र भी इसी पर टिकी होती है. स्लो चार्ज के अपने फायदे और फास्ट के अपने नुकसान. लॉन्ग टर्म में बैटरी की सेहत के लिए स्लो चार्ज फायदेमंद है लेकिन आपको पसंद नहीं आएगा. स्मार्टफोन आजकल फास्ट चार्जिंग के साथ आते हैं तो उसका सही से उपयोग कीजिए. मतलब रात भर खोंस कर मत रखिए बल्कि जब जरूरत हो तब चार्ज कीजिए. चार्ज कब करना है वो तो हो गया, अब कितना करना है वो भी जान लीजिए. 20 प्रतिशत से 80 प्रतिशत के बीच. फोन की बैटरी के जीरो होने तक का इंतजार मत कीजिए जब भी 20% के आसपास हो तब चार्ज कीजिए और सच में जरूरी न हो तो 80 प्रतिशत तक ही चार्ज कीजिए. ऊपर जो सायकल वाली बात बताई थी वो यहां काम आती है, ऐसा करने से बैटरी की सायकल आराम से पूरी होती है और उम्र भी बढ़ती है. कभी कभार जीरो से 100 प्रतिशत तक चार्ज करना बनता है.

रीसेंट ऐप्स या ऐप्स किलर

हम सभी ये करते है, वो ये कि उंगलियां चलाई और सारे ऐप बंद कर दिए. आपको लगा कि आपने होशियारी दिखाई तो ऐसा बिल्कुल नहीं है क्यूंकि ऐसा करने से आप जब भी उस ऐप को खोलेगें तो वो फिर शुरू से स्टार्ट होगा. मतलब रैम, सीपीयू सब की ताकत लगेगी जो बैटरी पर असर डालेगा. बंद मत कीजिए क्यूंकि अब स्मार्टफोन इतने स्मार्ट हो गए हैं कि उनको पता है कि कौन सा ऐप यूज हो रहा है और कौन सा नहीं.

वालपेपर्स

फोन खोलते ही सबसे पहले नजर आने वाला आपका प्यार कुत्ता या कोई और मनपसंद फ़ोटो सबसे बड़ी दुश्मन है बैटरी की. यदि हो सके तो ब्लैक वालपेपर रखिए और कमाल देखिए. यदि ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम वो वालपेपर यूज कीजिए जिसमें ब्लैक रंग ज्यादा हो. आजकल के फोन की स्क्रीन उन एलईडी प्वाइंट्स को बंद कर देती है जहां जहां ब्लैक रंग यूज होता है.

रिफ्रेश रेट

जितनी ज्यादा रिफ्रेश रेट उतना मक्खन डिस्प्ले. 90, 120, 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट से लैस डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन आने लगे हैं. क्या आपको पता है कि ये रिफ्रेश रेट बैटरी भी उतनी ही खाता है? अब करना ये है कि हर वक्त आपको हाई रिफ्रेश रेट की जरूरत नहीं तो उसको 60 हर्ट्ज पर रखिए और जब जरूरत हो तब ज्यादा, बैटरी पर असर साफ दिखेगा.आटो ब्राइटनेसये कमाल का फीचर है, बस ऑटो मोड पर रखो और चिंता से मुक्ति, लेकिन यही ऑटो मोड बैटरी भी बहुत खा जाता है. ऑटो मोड में जब भी आप धूप में होते हैं तो ब्राइटनेस फुल हो जाती है और अंदर रहने पर कम. आप इसको बंद करके मैनुअली सेट कीजिए. आपका अपना फोन है तो आपको अंदाज हो जाता है कि कितनी ब्राइटनेस चाहिए.अनवांटेड ऐप्स स्मार्टफोन यूज कर रहे हैं तो पता नहीं कितने ऐप्स आपने इंस्टाल कर रखे होंगे जो शायद एक बार से ज्यादा यूज न हुए हों. डिलीट कीजिए और यदि रखना है तो ऐप हायबरनेशन फीचर यूज कीजिए. आजकल हर फोन में होता है, भले नाम कुछ भी हो. यह उपयोग न होने वाले ऐप को फोन से तो हटा देता है लेकिन आपकी जानकारी और डेटा रखता है. जब जरूरत हो तब फिर इंस्टॉल कीजिए.गेमिंग मोडगेम खेलते वक्त सबसे ज्यादा बैटरी यूज होती है तो गेम खेलिए गेमिंग मोड के साथ. ये भी तकरीबन आजकल हर फोन का नेटिव फीचर है जो गेम खेलते समय नोटिफिकेशन और बाकी एक्टिविटी बंद कर देता है जिसका सीधा असर बैटरी पर पड़ता है.तापमानबात ऐसी है जनाब कि फोन की बैटरी और तापमान का सीधा रिश्ता है. आपके साथ शायद ऐसा हुआ हो कि आप अपना फोन खुली धूप में छोड़ आए हों और जब लौटे हों तब फोन बंद और स्क्रीन पर लिखा आया हो कि तापमान ज्यादा हो गया था. तापमान का ध्यान रखिए विशेषकर चार्ज करते समय. किचन जैसी जगह जहां कई बार तापमान बहुत बढ़ सकता है या कश्मीर की खुली बालकोनी जहां तापमान कम हो, दोनों जगह फोन चार्ज मत कीजिए.चार्जर और केबलएक नियम कि सिर्फ और सिर्फ फोन के साथ आए चार्जर और केबल से फोन चार्ज कीजिए, किसी दूसरे चार्जर से नहीं. यदि आपको दूसरे चार्जर की जरूरत है, जैसे कि आप ट्रेवल करते हैं तो उसी कंपनी का और आपके फोन का चार्जर ही खरीदिए.नेटवर्क और लोकेशनआपके साथ ऐसा हुआ होगा कि जब आप रेल से सफर करते हैं तो फोन की Battery जल्दी बोल जाती है. इसमें रेल मंत्री या रेल कर्मचारी का कोई हाथ नहीं है बल्कि ऐसा आपके फोन के लगातार नेटवर्क को खोजने के कारण होता है. फोन खोजता है नेटवर्क और बैटरी जाती है बोल. क्या कीजिए, चाहे रेल में हों या किसी ऐसी जगह जहां नेटवर्क मिलना मुश्किल हो वहां फ्लाइट मोड ऑन रखिए.लोकेशन बंद रखिए या फिर सेटिंग्स में जाकर सिर्फ उन ऐप के लिए इनेबल कीजिए जिनके लिए सच में आपकी लोकेशन काम की है. मौसम जैस ऐप को आपके घर की लोकेशन से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वो शहर का तापमान बताता है. लेकिन लोकेशन चालू होने से आपके फोन की बैटरी जरूर खाता रहता है.पावर सेविंग मोडआप बोलो कि इतना ज्ञान पेल दिए लेकिन ये तो हमको पता था. आप सही कह रहे, लेकिन हमारा कहना ये है कि आपको सिर्फ फोन के साथ आने वाले नेटिव पावर सेविंग मोड को यूज करना है. थर्ड पार्टी ऐप्स के बारे में बिल्कुल नहीं सोचना है. एक बात जानिए कि फोन के सिस्टम को चलाने के लिए जो जरूरी है वो फोन कंपनी साथ में देती है और बैटरी फोन के सिस्टम का हिस्सा है तो फोन के सॉफ्टवेयर के साथ आने वाला पावर सेविंग मोड इस्तेमाल कीजिए और इस काम राज्यके लिए थर्ड पार्टी ऐप्स के बारे में सोचना भी मत.

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